24 February 2026

लेखः कुमार भास्कर सेतु — डोली शाह

“लाइफलाइन” यानी जीवन रेखा,  सहारे का स्रोत,  यह किसी संस्था,  किसी प्रदेश के अस्तित्व को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक जरूरी साधन है। आम बोलचाल की भाषा में आज के युवा वर्ग अपने जीवन संगिनी “पति और पत्नी” को ही जीवन रेखा या लाइफलाइन कह देते हैं। इस तरह ब्रह्मपुत्र नदी जिसे असम में “लोहित” भी कहा जाता है, यह पूरे पूर्वोत्तर भारत विशेष कर असम की जीवन रेखा है। यह जल, विद्युत, उत्पादन, परिवहन और पारिस्थितिकी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप माजुली भी इसी नदी पर स्थित है। यह हमारे पूरे भारत का गौरव है।

उत्तर-पूर्व जिसका नाम आते ही हमारे आंखों के सामनेन एक ओर वो हरे-हरे चाय के बागान व वो ब्रह्मपुत्र की कल-कल करती ध्वनियां आती हैं तो वही दूसरी ओर दंगे, फसाद, खौफ,  उग्रवादियों का गढ़ का आइना भी हमारे सामने उभर कर आता था। पूरे उत्तर-पूर्व में वक्त के साथ-साथ बदलाव तो जरूर हुआ है, खासकर पिछले करीब बारह वर्षों में 2014 की भाजपा सरकार के आने के बाद विकास की पद्धति को एक तुल तो जरूर मिला, लेकिन फिर भी हम कह सकते हैं कि जिस तरह टूटे हुए बर्तनों को आकार देने में लंबा वक्त लगता है,  इसी तरह हर क्षेत्र में टूटे,  बिखरे, दंगे फसाद से लोगों में पैदा भय से विमुख करते हुए असम को जोड़ने में एक लंबा वक्त लग गया।

एक तरफ हमारे देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र नाथ मोदी जी पूरे उत्तर-पूर्व को अष्ट लक्ष्मी कहते हुए विकास का हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। आठों राज्यों में जहां जिस चीज की जरूरत पड़ी उन्होंने उसे मुहैया कर, विकास करने का हर संभव प्रयास किया। कभी भूपेन हाजारीका सेतु बनवा कर, तो कभी बोगी-बिल बनवा कर, तो कभी और अन्य छोटे-छोटे पुल आदि बनवाकर  पूरे उत्तर-पूर्व के कनेक्टिविटी को बढ़ावा दिया और इन सब में असम की वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा जी कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिये जा रहे हैं। एक तरफ जहां उन्होंने शांति स्थापित करने का भरसक प्रयास किया। वहीं विकास की प्रक्रिया को सातवें आसमान पर ले गए। इसी दौरान हमारे प्रधानमंत्री जी 2019 में असम के एक दौरे में ब्रह्मपुत्र नदी, जो पूरे गुवाहाटी के दक्षिणी भाग से उत्तर गुवाहाटी तक बहती है, उसके दोनों किनारो को सड़क मार्ग से जोड़ने का आग्रह करते हुए एक पुल बनाने का सलाह दिया और फरवरी 2019 को ही उसका आधारशिला रखा गया और उन्होंने इसका सारा बोझ हेमंत सरकार जी को दिया। उन्होंने भी बड़ी ईमानदारी से इस सेतु के निर्माण हेतु सारा भार एस पी एस कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दिया,  जिसका परिणाम आज हमारे सामने है– “भास्कर सेतु”!

 “भास्कर” जिसका अर्थ है संस्कृत में सूर्य,  प्रकाश दाता,  जो पूरे विश्व को प्रकाशित करता है। अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है। इसी तरह ब्रह्मपुत्र नदी पर भास्कर सेतु भी पूरे उत्तर पूर्व को अपने प्रकाश से खास कर असम को प्रकाशित करेगा, जिसका पूरा नाम –“कुमार भास्कर वर्मा सेतु” है। यह गुवाहाटी से उत्तर गुवाहाटी को जोड़ने वाला 2.86 किलोमीटर लंबा ब्रिज है। 6 लेनो वाला यह ब्रिज मात्र कंक्रीट और स्टील से बना है। जिसमें 53, 000 हजार मैट्रिक टन स्टील और 2.99 लाख घन मीटर कंक्रीट का इस्तेमाल हुआ है।  यह पूर्वोत्तर का पहला एक्स्ट्रा डोज पुल है जिसमें केवल स्टैंडर्ड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है,  जो उच्च शक्ति प्रदान करता है। यह मुख्य पल 1.24 किलोमीटर ही लंबा है उसके बाद इसी में एप्रोच रोड सहित कूल कनेक्टिविटी कॉरिडोर 8.4 लंबा जोड़ा गया है। इस फुल में भूकंपीय सुरक्षा के लिए फ्रिक्शन पेंडुलम बेयरिंग्स और पुल की सुरक्षा के लिए बी एच एम एस BHMS का उपयोग किया गया है। इसके अलावा इसमें पूर्वोत्तर की पहली सड़क आपातकालीन लैंडिंग सुविधा भी दी गई है। इसके बनने से एक घंटे लगने वाला सफर सिर्फ सात मिनट में ही तय किया जा सके गा।

अब आईए, जानते हैं आखिर इस सेतु का नाम “कुमार भास्कर” ही क्यों रखा गया?

कुमार भास्कर वर्मा जो असम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते थे।  सातवीं शताब्दी में (600 से 650 ई) में शासन करने वाले असम के कामरूप जिले के बर्मन वंश का सबसे शक्तिशाली एवं अंतिम शासक कुमार भास्कर थे। वे एक प्रतापी,  कुशल कूटनीतिज्ञ थे। उन्होंने हर्षवर्धन के शासनकाल में चीन के साथ रिश्ते निभाने की एक मजबूत कड़ी दिखाई। उनके शासनकाल में कला,  साहित्य, संस्कृति का बहुत अधिक विकास हुआ। इन्होंने चीन के साथ डिप्लोमेसी शातिर तरीके से की,  जिसके कारण उनके शासनकाल को “स्वर्ण युग” के नाम से संबोधित किया गया। उनके सम्मान में ही यह पुल बनाकर इतिहास को वर्तमान से जोड़ते हुए असम की प्राचीन गौरव को बढ़ाने का भरपूर प्रयास किया गया है।    

प्रभाव —+असम का एनर्जी बूस्टर कहलाने वाला यह पुल जहां पूरे गुवाहाटी शहर के भीड़भाड़ से हमारा बचाव करेगा, वहीं सराईघाट पुल पर यातायात के अत्यधिक दबाव को भी कम करेगा। उत्तरी गुवाहाटी में स्थित एम्स,  आई टी और गुवाहाटी उच्च न्यायालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थानों तक पहुंचना आसान बनाकर यह जुड़वा शहर के सपनों को भी साकार करेगी। वहीं इसके एक्स्ट्रा डोज प्रेसिडेंट्स कंक्रीट पी एस सी PSC भूकंप से भी हमारी रक्षा करेगा।  मौसम से आने वाले व्यवधानों से भी यह पुल ईट का पत्थर साबित होगा।  यह पुल जहां APLAC  चीन की बुरी नजरों से भी हमें बचाएगा। यह पूरा ब्रिज फ्यूचर ट्रैफिक डिमांड को देखते हुए बनाया गया है। यह पूरे नॉर्थ ईस्ट को विकास का एक नया रफ्तार दिखाएगा। यह हमारे पूरे अर्थव्यवस्था को बुसट करेगा और तरक्की का नया मार्ग प्रशस्त करेंगा। यह सेतु असम के साथ-साथ पूरे उत्तर-पूर्व को विकास का महासेतु साबित होगा।
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डोली शाह
निकट- पी एच ई
पोस्ट -सुलतानी छोरा
जिला -हैलाकांदी
असम-788162
मोबाइल-9395726158

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